Facebook Blogger Youtube

कुंडली में ग्रहों का छिद्म रूप

AACHARYA YATIN S UPADHYAY 02nd Mar 2017

छिद्र ग्रहो की कुंडली में स्थिति 

आइये जानते हैं विस्तार से छिद्र ग्रहो की गड़ना कैसे की जाती है

वैदिक ज्योतिष में अरिष्ट व प्रतिकूल घटनाओं का अध्ययन करने के लिए बहुत सी बातों का आंकलन किया जाता है.  जन्म कुंडली, संबंधित वर्ग कुंडली, दशा/अन्तर्दशा तथा घटना के समय का गोचर देखा जाता है. इन सभी में एक महत्वपूर्ण पहलू और देखा जाता है वह छिद्र ग्रह की दशा. हर कुंडली में छिद्र ग्रह अलग होते हैं और यह किसी भी तरह शुभ नहीं होते हैं. इनका आंकलन सदा अशुभ का आंकलन करने के लिए किया जाता है. छिद्र ग्रह की दशा आने पर व्यक्ति को अरिष्ट घटनाओं का सामना करना पड़ता है. आइए जाने कि कुंडली में कौन से ग्रह छिद्र ग्रह कहलाते हैं.

जन्म कुंडली का अष्टमेश

अष्टमेश के साथ युत ग्रह

अष्टम भाव में स्थित ग्रह

अष्टम भाव को दृष्ट करने वाले ग्रह

22वें द्रेष्काण का स्वामी

64वें नवांश का स्वामी

अष्टमेश का अतिशत्रु

उपरोक्त सभी को छिद्र ग्रह कहा जाता है. यह ग्रह जातक की रक्षा करने में बिलकुल भी सक्षम नहीं होते हैं. जन्म कुण्डली में जब भी इन ग्रहों की दशा/अन्तर्दशा आती है तब व्यक्ति को मानसिक, शारीरिक व आध्यात्मिक कष्टों की प्राप्ति होती है. उपरोक्त सातों ग्रहों में से आइए आपको 22वें द्रेष्काण और 64वें नवांश की गणना का तरीका बता दें.

22वां द्रेष्काण – 22nd Dreshkan

जन्म कुण्डली के लग्न की डिग्री को अष्टम भाव में रख दें और फिर उसकी गणना द्रेष्काण कुंडली बनाने की तरह करें अर्थात यदि ग्रह 0 से 10 अंशो के मध्य है तब वहीं अष्टम भाव में रहेगा. अगर ग्रह 10 से 20 अंश के मध्य है तब अष्टम से पांचवें भाव का स्वामी 22वें द्रेष्काण का स्वामी बनता है. यह जन्म कुंडली का 12वाँ भाव होता है. यदि यह अंश तीसरे द्रेष्काण में आते हैं तब अष्टम भाव से नौवें भाव का स्वामी अर्थात जन्म कुंडली के चतुर्थ भाव का स्वामी ग्रह 22वें द्रेष्काण का स्वामी बनता है.

22वें द्रेष्काण की गणना का एक सरल तरीका यह है कि द्रेष्काण कुंडली के अष्टम भाव में जो राशि पड़ती हो उस राशि का स्वामी 22वें द्रेष्काण का स्वामी होता है. इसे खरेश भी कहा जाता है.

64वें नवांश का स्वामी – Lord of 64th Navansh

चंद्रमा के अंशों को चंद्रमा से अष्टम भाव में स्थापित कर दें. यहाँ से इसकी गणना उसी तरह से करनी है जिस तरह से नवाँश कुंडली बनाने के लिए करते हैं. माना किसी जन्म कुंडली में चंद्रमा 15 अंश और 20 मिनट पर स्थित है. अब इसके इन अंशों को चंद्रमा से अष्टम भाव में रख देगें. माना चंद्रमा वृष राशि में है और चंद्रमा से आठवें भाव में धनु राशि आती है और वहाँ हमने यह अंश रखे हुए हैं. अब यह देखेगे कि 15 अंश 20 मिनट पर कौन सा नवाँश आता है. यह पांचवाँ नवांश आता है और धनु में है तब गणना मेष से होगी. मेष से पांचवीं राशि सिंह होती है और सूर्य इसका स्वामी होता है. इस प्रकार सूर्य 64वें नवांश का स्वामी कहा जाएगा.

इसे हम नवांश कुंडली से भी देख सकते हैं. नवांश कुंडली में चंद्रमा जिस राशि में स्थित होता है उससे चतुर्थ भाव का स्वामी 64वें नवांश का स्वामी होता है.

यतिन एस उपाध्याय


Comments

Post

Astro Dev Daleep Gautam

Good


Latest Posts

Top