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जीवांश एवं परमात्मांश

Acharya Sarwan Kumar Jha 06th Apr 2018

जानकारी नयी नहीं लेकिन हमारा ध्यान इस ओर नहीं जाता, आप लोग प्रेम से पोस्ट पढ़ते रहें हम आज भी ज्योतिष की ही बात कर रहे अध्यात्म की नहीं । वेद से प्राप्त यह ज्ञान है तो इश्वर की बात होगी ही ।

मैत्रेय जी ने सृष्टिक्रम से संबंधित जब प्रश्न किया तो महर्षि पराशर जी ने बताया कि -

अपने एक अंश से ही जगत की सृष्टि, पालन व संहार करने वाले व्यक्तात्मा विष्णु तीनों गुणों से युक्त हैं तथा अपने गुण प्रधान शक्ति से ही जगत का सृष्टि, पालन व संहार करते हैं ।

ब्रह्मा - भू शक्ति से युक्त ब्रह्मरूप होकर त्रिभुवन की सृष्टि करते हैं । (सतोगुण से युक्त)

विष्णु - श्री शक्ति से युक्त होकर त्रिभुवन का पालन करते हैं । (रजोगुण से युक्त)

शिव - नीलशक्ति से युक्त होकर संहार करते हैं । (तमोगुण से युक्त)

यहां महर्षि पराशर कहते हैं सभी जीवों में परमात्मा रहते हैं और यह समस्त भुवन परमात्मा में ही स्थित होता है । सभी जीवों में जीवांश एवं परमात्मांश होते हैं । इनमें किसी में जीवांश अधिक होते हैं और किसी में परमात्मा अंश अधिक होते हैं ।

आगे जीवांश एवं परमात्मांश यहां बताने का औचित्य एवं किसमें जीवांश अधिक होता है तथा किसमें परमात्मांश अधिक होते हैं इसकी जानकारी लेते हुए ज्योतिष को समझने का प्रयास करेंगे ।


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