MUHURAT OF DEEKSHA

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Vaswati Baksiddha 29th Jun 2019

                                                                          AUSPICIOUS TIME FOR DIKSHA

 

                                                            Divyan Gyana Yoto Dadyat Kuryat Papo Khayastato.

                                                            Tasmandi Khyeti Sa Prokta Sarbotantrasso Sammata.

                                                                                      ( Viswasar Tantra )

 

According to Vishnu Yamal, the process that bestows Divyam Gyannam & destroys sin, the seed of sin and ignorance is called Diksha. Diksha or initiation is the first step to enter the spiritual world. 

Now let’s see which is the exact auspicious moment for Diksha.

We know, twelve zodiac signs are divided into three divisions according to their flexibility. They are cardinal, fixed & dual. Fixed signs are Taurus, Leo, Scorpio & Aquarius. Fixed signs are favorable for initiation lagna. Because I think fixed or static signs are focused & determined and have stamina for persistence action. And for this characteristic of nature fixed signs are recommended in sastra as auspicious lagna for initiation. Along with fixed lagna if beneficiary planets are resided in Kendra & Jupiter resides in ninth house that will be more auspicious. 

Next I will go to Nakshatra. Two classes of nakshatra are favouable for Diksha by their nature. One type is Druba nakshatra & another is Mridu Nakshatra. Dhruba Nakshatras are Rohini , Uttar Falguni, Uttar Asshada & Uttar Vadropada. These nakshatras are favorable bcs they offer fixity. 

Mridu nakshatras Mrigashira ,  Chitra , Anuradha & Revti are also favourable for this auspicious ceremony. Muhurta Chintamoni suggested that the qualities of the nakshatras are even more accentuated when they coincide with the certain days. For instance Surya is the most steady plaet, hence it is maped to Dhruba nakshatra. Planet Venus is considered as female planet hence it is maped to Mridu nakshatra.That’s why Sunday & Friday are favorable for Diksha. But the most favorable day is Saturday. Bcs planet Saturn is steady, slow, fixed and most spiritual planet by nature. 

Next is solar months. Vaisakha, Shravana ,Asvina, Kartik , Margasirsa ,Magha & Phalguna are auspicious for this spiritual ceremony. 

But the moment/ Muhurat for Diksha will be the most accentuated when the birth month , tithi and nakshaqtra coincides with each other.

Guru Purnima is also an auspicious day to start spiritual journey. 

This year The festival of Guru Purnima  will be celebrated on 16th of July 2019, Tuesday.
Best wishes for those who are gonna be inniciated on this auspicious occasion of Gurupurnima.

stay blessed.

Regards Vaswati Baksiddha

 

 


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यस्मिन् जीवति जीवन्ति बहव: स तु जीवति | काकोऽपि किं न कुरूते चञ्च्वा स्वोदरपूरणम् || If the 'living' of a person results in 'living' of many other persons, only then consider that person to have really 'lived'. Look even the crow fill it's own stomach by it's beak!! (There is nothing great in working for our own survival) I am not finding any proper adjective to describe how good this suBAshit is! The suBAshitkAr has hit at very basic question. What are all the humans doing ultimately? Working to feed themselves (and their family). So even a bird like crow does this! Infact there need not be any more explanation to tell what this suBAshit implies! Just the suBAshit is sufficient!! *जिसके जीने से कई लोग जीते हैं, वह जीया कहलाता है, अन्यथा क्या कौआ भी चोंच से अपना पेट नहीं भरता* ? *अर्थात- व्यक्ति का जीवन तभी सार्थक है जब उसके जीवन से अन्य लोगों को भी अपने जीवन का आधार मिल सके। अन्यथा तो कौवा भी भी अपना उदर पोषण करके जीवन पूर्ण कर ही लेता है।* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताराम।

न भारतीयो नववत्सरोSयं तथापि सर्वस्य शिवप्रद: स्यात् । यतो धरित्री निखिलैव माता तत: कुटुम्बायितमेव विश्वम् ।। *यद्यपि यह नव वर्ष भारतीय नहीं है। तथापि सबके लिए कल्याणप्रद हो ; क्योंकि सम्पूर्ण धरा माता ही है।*- ”माता भूमि: पुत्रोSहं पृथिव्या:” *अत एव पृथ्वी के पुत्र होने के कारण समग्र विश्व ही कुटुम्बस्वरूप है।* पाश्चातनववर्षस्यहार्दिकाःशुभाशयाः समेषां कृते ।। ------------------------------------- स्वत्यस्तु ते कुशल्मस्तु चिरयुरस्तु॥ विद्या विवेक कृति कौशल सिद्धिरस्तु ॥ ऐश्वर्यमस्तु बलमस्तु राष्ट्रभक्ति सदास्तु॥ वन्शः सदैव भवता हि सुदिप्तोस्तु ॥ *आप सभी सदैव आनंद और, कुशल से रहे तथा दीर्घ आयु प्राप्त करें*... *विद्या, विवेक तथा कार्यकुशलता में सिद्धि प्राप्त करें,* ऐश्वर्य व बल को प्राप्त करें तथा राष्ट्र भक्ति भी सदा बनी रहे, आपका वंश सदैव तेजस्वी बना रहे.. *अंग्रेजी नव् वर्ष आगमन की पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं* ज्योतिषाचार्य बृजेश कुमार शास्त्री

आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः | नास्त्युद्यमसमो बन्धुः कृत्वा यं नावसीदति || Laziness is verily the great enemy residing in our body. There is no friend like hard work, doing which one doesn’t decline. *मनुष्यों के शरीर में रहने वाला आलस्य ही ( उनका ) सबसे बड़ा शत्रु होता है | परिश्रम जैसा दूसरा (हमारा )कोई अन्य मित्र नहीं होता क्योंकि परिश्रम करने वाला कभी दुखी नहीं होता |* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताआलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः | नास्त्युद्यमसमो बन्धुः कृत्वा यं नावसीदति || Laziness is verily the great enemy residing in our body. There is no friend like hard work, doing which one doesn’t decline. *मनुष्यों के शरीर में रहने वाला आलस्य ही ( उनका ) सबसे बड़ा शत्रु होता है | परिश्रम जैसा दूसरा (हमारा )कोई अन्य मित्र नहीं होता क्योंकि परिश्रम करने वाला कभी दुखी नहीं होता |* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताराम।राम।

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