WHY SO MANY TRAGEDIES IN JULY 2017?

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Neha Pradeep Saini 21st Aug 2017

There are more such news to come as

1.Mars/ Mangal debilitated right now in Cancer/ Kark Rasi (Mars is a significator /karak of head injury ,road accidents, dr's

2.Saturn/ Shani retrograde in Scorpio house of mars is causing more trouble to mars

3. Retro Saturn with its 8th from Aries causing more problems to Mesh Rasi (Name staring from A/ C/ L)

4. Rahu aspecting Aries making mars weak

5. Mars aspects Ketu in Kumbh/ Acquarius causing more agony

Most of the negative events in life takes place when shani, mangal, rahu , ketu aspect each other in transit along with some major planetary affliction

Many reason more but this should be enough to start with...

Thanks

Neha Pradeep Saini


 


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Astro Premkumar mg

very good article. Thanks for the astrological analysis. All the ebst


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*वसंत नवरात्र 13 अप्रैल से 21 अप्रैल 2021 तक* चैत्र नवरात्रि घटस्थापना का शुभ मुहूर्त 13 अप्रैल दिन मंगलवार प्रातः 5:30 से 10:15 तक। अभिजीत मुहूर्त 11:56 से दोपहर 12: 47 तक होगा। 13 अप्रैल से नव संवत्सर भारतीय नववर्ष की शुरुआत भी होगी। क्रमश: नवरात्र 13 अप्रैल प्रतिपदा ,शैलपुत्री। 14 अप्रैल द्वितीया, ब्रह्मचारिणी। 15 अप्रैल तृतीया, चंद्रघंटा। 16 अप्रैल चतुर्थी ,कुष्मांडा। 17 अप्रैल पंचमी, स्कंदमाता। 18 अप्रैल षष्ठी, कात्यायनी। 19 अप्रैल सप्तमी, कालरात्रि। 20 अप्रैल अष्टमी, महागौरी। 21 अप्रैल नवमी, सिद्धिदात्री मां का पूजन होता है। ज्योतिषाचार्य अजय शास्त्री के अनुसार दुर्गा सप्तशती नारायण अवतार श्री व्यास जी द्वारा रचित महापुराणों में मार्कंडेय पुराण से ली गई है। इसमें 700 श्लोक व 13 अध्यायों का समावेश होने के कारण इसे सप्तशती का नाम दिया गया है। तंत्र शास्त्रों में इसका सर्वाधिक महत्व प्रतिपादित है और तांत्रिक क्रियाओं का इसके पाठ में बहुत उपयोग होता है। दुर्गा सप्तशती में 360 शक्तियों का वर्णन है। ज्योतिषाचार्य ने बताया है कि शक्ति पूजन के साथ भैरव पूजन भी अनिवार्य है। दुर्गासप्तशती का हर मंत्र ब्रह्मवशिष्ठ विश्वामित्र ने शापित किया है। शापोद्धार के बिना पाठ का फल नहीं मिलता दुर्गा सप्तशती के 6 अंगों सहित पाठ करना चाहिए कवच, अर्गला, कीलक और तीनों रहस्य महाकाली महालक्ष्मी महासरस्वती का रहस्य बताया गया है। नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती की चरित्र का क्रमानुसार पाठ करने से शत्रु नाश और लक्ष्मी की प्राप्ति व सर्वदा विजय होती है।

यस्मिन् जीवति जीवन्ति बहव: स तु जीवति | काकोऽपि किं न कुरूते चञ्च्वा स्वोदरपूरणम् || If the 'living' of a person results in 'living' of many other persons, only then consider that person to have really 'lived'. Look even the crow fill it's own stomach by it's beak!! (There is nothing great in working for our own survival) I am not finding any proper adjective to describe how good this suBAshit is! The suBAshitkAr has hit at very basic question. What are all the humans doing ultimately? Working to feed themselves (and their family). So even a bird like crow does this! Infact there need not be any more explanation to tell what this suBAshit implies! Just the suBAshit is sufficient!! *जिसके जीने से कई लोग जीते हैं, वह जीया कहलाता है, अन्यथा क्या कौआ भी चोंच से अपना पेट नहीं भरता* ? *अर्थात- व्यक्ति का जीवन तभी सार्थक है जब उसके जीवन से अन्य लोगों को भी अपने जीवन का आधार मिल सके। अन्यथा तो कौवा भी भी अपना उदर पोषण करके जीवन पूर्ण कर ही लेता है।* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताराम।

न भारतीयो नववत्सरोSयं तथापि सर्वस्य शिवप्रद: स्यात् । यतो धरित्री निखिलैव माता तत: कुटुम्बायितमेव विश्वम् ।। *यद्यपि यह नव वर्ष भारतीय नहीं है। तथापि सबके लिए कल्याणप्रद हो ; क्योंकि सम्पूर्ण धरा माता ही है।*- ”माता भूमि: पुत्रोSहं पृथिव्या:” *अत एव पृथ्वी के पुत्र होने के कारण समग्र विश्व ही कुटुम्बस्वरूप है।* पाश्चातनववर्षस्यहार्दिकाःशुभाशयाः समेषां कृते ।। ------------------------------------- स्वत्यस्तु ते कुशल्मस्तु चिरयुरस्तु॥ विद्या विवेक कृति कौशल सिद्धिरस्तु ॥ ऐश्वर्यमस्तु बलमस्तु राष्ट्रभक्ति सदास्तु॥ वन्शः सदैव भवता हि सुदिप्तोस्तु ॥ *आप सभी सदैव आनंद और, कुशल से रहे तथा दीर्घ आयु प्राप्त करें*... *विद्या, विवेक तथा कार्यकुशलता में सिद्धि प्राप्त करें,* ऐश्वर्य व बल को प्राप्त करें तथा राष्ट्र भक्ति भी सदा बनी रहे, आपका वंश सदैव तेजस्वी बना रहे.. *अंग्रेजी नव् वर्ष आगमन की पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं* ज्योतिषाचार्य बृजेश कुमार शास्त्री

आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः | नास्त्युद्यमसमो बन्धुः कृत्वा यं नावसीदति || Laziness is verily the great enemy residing in our body. There is no friend like hard work, doing which one doesn’t decline. *मनुष्यों के शरीर में रहने वाला आलस्य ही ( उनका ) सबसे बड़ा शत्रु होता है | परिश्रम जैसा दूसरा (हमारा )कोई अन्य मित्र नहीं होता क्योंकि परिश्रम करने वाला कभी दुखी नहीं होता |* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताआलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः | नास्त्युद्यमसमो बन्धुः कृत्वा यं नावसीदति || Laziness is verily the great enemy residing in our body. There is no friend like hard work, doing which one doesn’t decline. *मनुष्यों के शरीर में रहने वाला आलस्य ही ( उनका ) सबसे बड़ा शत्रु होता है | परिश्रम जैसा दूसरा (हमारा )कोई अन्य मित्र नहीं होता क्योंकि परिश्रम करने वाला कभी दुखी नहीं होता |* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताराम।राम।

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