How astrology works?

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Anil Shrivastava 20th Mar 2019

हम में से बहुत से लोगों ने अपनी कुंडली कभी न कभी किसी न किसी पंडित जी को अवश्य दिखाई होगी और पंडित जी ने कुछ बुद्बुदाते हुए कुछ अपनी उंगली पर गिनते हुए कुछ गणनाएं की होंगी । क्या आपके मन में कभी यह जिज्ञासा नहीं हुई कि आखिर ये क्या कर रहे हैं और कैसे फलकथन करते हैं ? आइए इस बारे में कुछ चर्चा करते हैं पंडित जी को आप जिस भाव से संबंधित समस्या के बारे में पूछते हैं वह उस भाव को और उस भाव के स्वामी को और उन पर पड़ रही दृष्टियों के प्रभाव को देखते हुए ही कुछ कहते हैं जैसे आपने विवाह के बारे में पूछा कि यह विवाह कब होगा तो वह सप्तम भाव सप्तमेष और उसके ऊपर पढ़ रही ग्रहों की दृष्टियां और युति की समीक्षा करके कुछ परिणाम निकालते हैं और यदि कहीं राहु केतु शनि मंगल दृष्टिगत हुए तो तुरंत ही अशुभ फल की घोषणा कर देते हैं या साढ़ेसाती, पितृदोष, मंगल दोष , कालसर्प योग होने की पुष्टि करते हुए उपाय पर पूरा जोर लगा देते हैं आप तो गए थे विवाह कब होगा यह पता करने पर यह तो आपको बताया नहीं कि वह कब होगा एक नई समस्या आपके सामने खड़ी हो गई और जिसके बारे में आपको पहले से कोई पता नहीं था तो विवाह की बात तो आप भूल गए और इस समस्याओं का समाधान करने में ही संलग्न हो गए । अब इनके लिए एक ही चीज की जरूरत होती है और वह होती है पूजा और पूजा तो सिर्फ पंडित जी करवाएंगे तभी तो इनका सारा जोर पूजा पर है । एक बार मैं फ्री एस्ट्रो सेशन कर रहा था ऐसे सेशन में यदाकदा लोगों को गाइड करने के लिए करता रहता हूं तब जोधपुर से एक बड़े नाम वाले पंडित जी ऑनलाइन मुझसे पूछने लगे कि मेरे बेटे की नौकरी कब लगेगी और वह प्राइवेट होगी या सरकारी होगी तो मेरे मन में तो आया कि कह दूं कि आपका तो इतना बड़ा नाम है ज्योतिष के क्षेत्र में आप खुद क्यों नहीं पता करते पर मैं जानता हूं कि वह पारंपरिक ज्योतिष में काम करते हैं और जिस में प्रवीणता हासिल करना हर किसी के बस का नहीं है इसके लिए बहुत मेहनत बेहद और बहुत इच्छा शक्ति चाहिए । कुछ लोग लघुपाराशरी के 40 नियम याद करके ज्योतिष शास्त्री होने का स्वांग करने लगते हैं उन्हें खुद ही पता नहीं होता की घटनाओं का विश्लेषण कैसे करते हैं और किस तरीके से हम कोई नतीजे निकाल सकते हैं किसी की आलोचना करना मेरा मकसद नहीं है मेरा मकसद है कि समाज को यह पता चलना चाहिए कि ज्योतिष आखिर है क्या ? रॉकेट साइंस तो है नहीं जिसका कोई बहुत भारी अध्ययन हो ठीक है ज्योतिष है और उसके सिद्धांत हैं और सिद्धांतों को काटने के सिद्धांत हैं इसलिये कोई निर्णय करना बहुत मुश्किल होता है मैं नाडी़ ज्योतिष पर सबसे ज्यादा जोर देता हूं क्योंकि भविष्य फल कथन की जो तकनीक नाड़ी ज्योतिष में वह बहुत ही आसान है कुंडली पर नजर डालते ही आपको 2 मिनट में पता चल जाएगा कि क्या होना है जैसे विवाह कब होगा यह जानना बहुत ही आसान है सप्तम भाव के कस्पल सब लार्ड को देख लीजिए वह कौन सा ग्रह है और यदि यह ग्रह 2,7,11 इन भावों को सिग्नी फाइ कर रहा है तो विवाह जरूर होगा इसमें कोई शक नहीं है लेकिन अगर जो यह ग्रह 1,6,10 इन भावों को सिग्नीफाई कर रहा है तो कितने ही पूजा पाठ करा लो विवाह नहीं होगा । अब हमें देखना है कि यह है कि विवाह की प्रॉमिस तो मौजूद है पर विवाह होगा कब इसके लिए सबसे पहले चल रही महादशा का विश्लेषण करेंगे अगर यह पॉजिटिव है तो क्या अंतर दशा और प्रत्यंतर दशा भी पॉजिटिव है यदि तीनों ही पॉजिटिव हैं तो विवाह होगा और जो अगर इनमें से कोई नेगेटिव है तो आगे की अंतर या प्रत्यंतर दशा का विश्लेषण करना होगा अब जब एक बार हमने यह जान लिया है कि इस अवधि में विवाह होगा यह अवधि 3 माह से लेकर 3 साल तक की हो सकती अब यह तो बहुत लंबा समय हो गया तो पिन पॉइंट करने के लिए हमें गोचर का सहारा लेना होगा और यह भी बहुत आसान है यह देख लीजिए कि विवाह के पॉजिटिव इंडिकेशन देने वाले कोई तीन ग्रह जब एक साथ एक ही राशि में आ जाएंगे या एक दूसरे को देखने लगेंगे तो विवाह उस अवधि में होगा यदि आपके मन में भी कोई प्रश्न हो तो पूछ सकते हैं


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*वसंत नवरात्र 13 अप्रैल से 21 अप्रैल 2021 तक* चैत्र नवरात्रि घटस्थापना का शुभ मुहूर्त 13 अप्रैल दिन मंगलवार प्रातः 5:30 से 10:15 तक। अभिजीत मुहूर्त 11:56 से दोपहर 12: 47 तक होगा। 13 अप्रैल से नव संवत्सर भारतीय नववर्ष की शुरुआत भी होगी। क्रमश: नवरात्र 13 अप्रैल प्रतिपदा ,शैलपुत्री। 14 अप्रैल द्वितीया, ब्रह्मचारिणी। 15 अप्रैल तृतीया, चंद्रघंटा। 16 अप्रैल चतुर्थी ,कुष्मांडा। 17 अप्रैल पंचमी, स्कंदमाता। 18 अप्रैल षष्ठी, कात्यायनी। 19 अप्रैल सप्तमी, कालरात्रि। 20 अप्रैल अष्टमी, महागौरी। 21 अप्रैल नवमी, सिद्धिदात्री मां का पूजन होता है। ज्योतिषाचार्य अजय शास्त्री के अनुसार दुर्गा सप्तशती नारायण अवतार श्री व्यास जी द्वारा रचित महापुराणों में मार्कंडेय पुराण से ली गई है। इसमें 700 श्लोक व 13 अध्यायों का समावेश होने के कारण इसे सप्तशती का नाम दिया गया है। तंत्र शास्त्रों में इसका सर्वाधिक महत्व प्रतिपादित है और तांत्रिक क्रियाओं का इसके पाठ में बहुत उपयोग होता है। दुर्गा सप्तशती में 360 शक्तियों का वर्णन है। ज्योतिषाचार्य ने बताया है कि शक्ति पूजन के साथ भैरव पूजन भी अनिवार्य है। दुर्गासप्तशती का हर मंत्र ब्रह्मवशिष्ठ विश्वामित्र ने शापित किया है। शापोद्धार के बिना पाठ का फल नहीं मिलता दुर्गा सप्तशती के 6 अंगों सहित पाठ करना चाहिए कवच, अर्गला, कीलक और तीनों रहस्य महाकाली महालक्ष्मी महासरस्वती का रहस्य बताया गया है। नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती की चरित्र का क्रमानुसार पाठ करने से शत्रु नाश और लक्ष्मी की प्राप्ति व सर्वदा विजय होती है।

यस्मिन् जीवति जीवन्ति बहव: स तु जीवति | काकोऽपि किं न कुरूते चञ्च्वा स्वोदरपूरणम् || If the 'living' of a person results in 'living' of many other persons, only then consider that person to have really 'lived'. Look even the crow fill it's own stomach by it's beak!! (There is nothing great in working for our own survival) I am not finding any proper adjective to describe how good this suBAshit is! The suBAshitkAr has hit at very basic question. What are all the humans doing ultimately? Working to feed themselves (and their family). So even a bird like crow does this! Infact there need not be any more explanation to tell what this suBAshit implies! Just the suBAshit is sufficient!! *जिसके जीने से कई लोग जीते हैं, वह जीया कहलाता है, अन्यथा क्या कौआ भी चोंच से अपना पेट नहीं भरता* ? *अर्थात- व्यक्ति का जीवन तभी सार्थक है जब उसके जीवन से अन्य लोगों को भी अपने जीवन का आधार मिल सके। अन्यथा तो कौवा भी भी अपना उदर पोषण करके जीवन पूर्ण कर ही लेता है।* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताराम।

न भारतीयो नववत्सरोSयं तथापि सर्वस्य शिवप्रद: स्यात् । यतो धरित्री निखिलैव माता तत: कुटुम्बायितमेव विश्वम् ।। *यद्यपि यह नव वर्ष भारतीय नहीं है। तथापि सबके लिए कल्याणप्रद हो ; क्योंकि सम्पूर्ण धरा माता ही है।*- ”माता भूमि: पुत्रोSहं पृथिव्या:” *अत एव पृथ्वी के पुत्र होने के कारण समग्र विश्व ही कुटुम्बस्वरूप है।* पाश्चातनववर्षस्यहार्दिकाःशुभाशयाः समेषां कृते ।। ------------------------------------- स्वत्यस्तु ते कुशल्मस्तु चिरयुरस्तु॥ विद्या विवेक कृति कौशल सिद्धिरस्तु ॥ ऐश्वर्यमस्तु बलमस्तु राष्ट्रभक्ति सदास्तु॥ वन्शः सदैव भवता हि सुदिप्तोस्तु ॥ *आप सभी सदैव आनंद और, कुशल से रहे तथा दीर्घ आयु प्राप्त करें*... *विद्या, विवेक तथा कार्यकुशलता में सिद्धि प्राप्त करें,* ऐश्वर्य व बल को प्राप्त करें तथा राष्ट्र भक्ति भी सदा बनी रहे, आपका वंश सदैव तेजस्वी बना रहे.. *अंग्रेजी नव् वर्ष आगमन की पर हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं* ज्योतिषाचार्य बृजेश कुमार शास्त्री

आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः | नास्त्युद्यमसमो बन्धुः कृत्वा यं नावसीदति || Laziness is verily the great enemy residing in our body. There is no friend like hard work, doing which one doesn’t decline. *मनुष्यों के शरीर में रहने वाला आलस्य ही ( उनका ) सबसे बड़ा शत्रु होता है | परिश्रम जैसा दूसरा (हमारा )कोई अन्य मित्र नहीं होता क्योंकि परिश्रम करने वाला कभी दुखी नहीं होता |* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताआलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महान् रिपुः | नास्त्युद्यमसमो बन्धुः कृत्वा यं नावसीदति || Laziness is verily the great enemy residing in our body. There is no friend like hard work, doing which one doesn’t decline. *मनुष्यों के शरीर में रहने वाला आलस्य ही ( उनका ) सबसे बड़ा शत्रु होता है | परिश्रम जैसा दूसरा (हमारा )कोई अन्य मित्र नहीं होता क्योंकि परिश्रम करने वाला कभी दुखी नहीं होता |* हरि ॐ,प्रणाम, जय सीताराम।राम।

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